Posts

Showing posts from May, 2021

जाने दीजिये न पापा

Image
                                                                 .. *"जाने दीजिये न पापा "* ... रेलगाड़ी की कहानी बड़ी रोमांचक थी , घूमने की इच्छा और भी प्रबल हो गई थी , एक गाडी है - जहाँ पंद्रह मिनट में दस साल बीत जाते हैं , लगभग डेड दो घंटे में सभी वापस आ जाते हैं , बस कुछ देर की ही तो बात है , आप आराम कीजिये , मैं जाकर जल्द वापस आ जाऊँगी।। पूछा पिता ने - वहाँ जाकर मुझे भूल तो न जाओगी ? नहीं पापा - आपके जैसा कोई नहीं , और फिर मैं तो आपकी लाड़ली हूँ न ? आपको कैसे भूल जाऊँगी। पिता कुछ मुस्कराये , बोले , फिर किसी दिन चली जाना। मैं थोड़ा रूठ गई - आप रोज ऐसे ही कहते हैं , दो तीन घंटे में क्या बदल जायेगा , "जाने दीजिये न पापा " कितने किस्से सुने हैं - वहाँ हजारों लोग - आपके अपने होते हैं , आप उनसे और वो आपसे प्यार करते हैं , मुझे देखना है वो सपनों का शहर , जो सपना जैसा नहीं लगता , वो रेल...

Grace 6

Image
                                                       ..                                                   Grace - 6                                                           Grace  अरण्य से गुजरते मन्त्रहीन विचारों के जाल से दूर दूर दूर तक फैली पूरी तरह से अनछुई सी एक पेड़ की शाखाएँ देख मैं धीरे से बैठ गई  अचानक एक पत्ती की खुशबू  मेरे विचारशून्य मन को बिना कुरेदे आनंद का आभास देने लगी तरंगें जैसे झूला झुला रही थी वो जंगल की नीरवता और गहन हो गई ध्यान देने पर भी वहाँ बस वह खुशबू  ही रह गई रिद्धिमा 16 - 06 - 2021

किरदार

Image
                                                         ..                                                      किरदार धर्म युद्ध में अधर्म के साथ खड़े होकर , अपना धर्म निभा रहे थे , चारों ओर से तीर भाले तलवार चलाये जा रहे थे , या तो ढेर होगा अर्जुन , या कृष्ण प्रतिज्ञा टूटेगी ,  भीष्म प्रतिज्ञा सुन , कैसे गुडाकेष को निद्रा आएगी , पर वो तो सोता था गहरी निद्रा में , भरोसा था अटल कि है वह हरी की क्षत्र छाया में , चारों ओर हा - हा कार मच गया था , मानवता से मनुष्य का विश्वास उठ गया था , पाला पोसा , जिन हाथों से खिलाया था , मार दुँगा उसे ऐसा संकल्प कैसे उठाया था , बहुत रोष में पितामह आ गये थे , तीर पर तीर मारकर व्यग्र किये और हुए जा रहे थे , नेत्र कृष्ण के लाल हो गए थे , देख भक्त पर विपति कृष्ण बेहाल हो गए थे , ...