जाने दीजिये न पापा
.. *"जाने दीजिये न पापा "* ... रेलगाड़ी की कहानी बड़ी रोमांचक थी , घूमने की इच्छा और भी प्रबल हो गई थी , एक गाडी है - जहाँ पंद्रह मिनट में दस साल बीत जाते हैं , लगभग डेड दो घंटे में सभी वापस आ जाते हैं , बस कुछ देर की ही तो बात है , आप आराम कीजिये , मैं जाकर जल्द वापस आ जाऊँगी।। पूछा पिता ने - वहाँ जाकर मुझे भूल तो न जाओगी ? नहीं पापा - आपके जैसा कोई नहीं , और फिर मैं तो आपकी लाड़ली हूँ न ? आपको कैसे भूल जाऊँगी। पिता कुछ मुस्कराये , बोले , फिर किसी दिन चली जाना। मैं थोड़ा रूठ गई - आप रोज ऐसे ही कहते हैं , दो तीन घंटे में क्या बदल जायेगा , "जाने दीजिये न पापा " कितने किस्से सुने हैं - वहाँ हजारों लोग - आपके अपने होते हैं , आप उनसे और वो आपसे प्यार करते हैं , मुझे देखना है वो सपनों का शहर , जो सपना जैसा नहीं लगता , वो रेल...