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Emotion 4 Series

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  विखंडित स्वर” उलटी पड़ी हैं पंक्तियाँ— जैसे समय ने शब्दों को पढ़ने से मना कर दिया हो। स्याही के बीच फँसी हुई साँस, हर अक्षर आधा जन्म, आधा विस्मरण। ये जो कटे हुए स्ट्रोक्स हैं— शायद किसी ने स्मृति को बार-बार मिटाकर लिखा है। प्रकृति भी यहाँ सीधी नहीं बहती, हवा तिरछी चलती है, और पत्ते शब्दों की तरह बिखरते हैं। मैं पढ़ना चाहती हूँ— पर हर अर्थ, अपने ही भीतर सिमट कर चित्र बन जाता है। रिद्धिमा “Fragmented Voice” The lines lie overturned— as if Time itself has refused to read the words. A breath caught amidst the ink; every letter—half birth, half oblivion. These severed strokes— perhaps someone has written them by repeatedly erasing memory. Even nature here does not flow straight; the wind blows askew, and leaves scatter like words. I wish to read— yet every meaning, curling inward upon itself, transforms into an image. Riddhima

मौन

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  बहुत कुछ कहते हैं, पर हम मौन रहते हैं, जो प्यार करते हैं, वो दिल की आहट समझते हैं ... रिद्धिमा 26/2/21

Wake Up Call

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  बहुत बेचैन होकर कहा, पर जब कहा 'मैं ' केन्द्र में रहा, तुमसे वास्ता मेरा बहुत दिल के करीब रहा, पर "मैं " और "तुम " फिर भी बना रहा, गुणगान तो कुछ दिल से है तेरा किया , पर फिर भी "मैं ही हूँ " ये न मुझसे हुआ, वो तृप्त आत्मा, वो एकत्व भाव का, वो एक तिनका बचाव का, दिल में है बसा हुआ, साथ है तू मेरे, ये भी तो है तूने दिया, पर नीर छीर का भेद तो अबभी है बना हुआ , अक्स की महत्ता ने, झूठ है बना दिया, जानकर भी न जाना ये, तो सब जानकर भी, मैंने क्या है जानकर किया।। रिद्धिमा 21/3/21

परम शांति

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  एक पत्ती पर अपना हाथ टिकाकर, सुबह के सूर्य की उष्मा का आनंद लेकर, एक पुष्प भी अपना जीवन बनाता है सार्थक, ए मन अब इस परम शांति में तू भी विश्राम कर। रिद्धिमा 23/9/21

Grace 2

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  The tree looked in amazement, When the ultimate chakra comes out, Somebody learned to calm down engaged in duty, ready for enterprise, In a life made of colored wool, Colors are all - knowing this, Welcomed everyone with outstretched hands, As soon as the mind is calm, Boat in the middle of the whirlpool, The turmoil also stopped, Warped life, Like the heat of the sun in deep forest blossomed more. Riddhima 24/12/21

Who Am I Series

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Beyond Sight-3  मैं ही छाया बन भटकी, मैं ही उजियारा पाई, अपने ही रूपों की भीड़ में, स्वयं को खोज न पाई। पंख लगे हर पीड़ा को, नभ में फिर भी बंधन है— दृश्य से परे कहीं, मेरी ही मौन गहराई। I wandered as a shadow, I found the light; Yet amidst the crowd of my own forms, I could not find myself. Every pain grew wings, yet the skies remain a cage— Somewhere beyond the visible, lies my own silent depth. Riddhima

Gender Empathy

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Gender Empathy मैं ही विभाजन, मैं ही समन्वय, शिव में शक्ति, शक्ति में स्वयं। रेखाओं के इस जाल तले भी, बहता एक ही जीवन-क्रम। सूखी शाखों में भी स्पंदन, दृश्य अदृश्य का मधुर संवाद, अर्धनारी का मौन संतुलन, जाग्रत करता अंतःप्रसाद। ना स्त्री, ना पुरुष की सीमा, बस एक करुणा का विस्तार— मैं ही तुम, तुम ही मैं बनकर, रचता जग में समता का संसार। रिद्धिमा