.. किरदार धर्म युद्ध में अधर्म के साथ खड़े होकर , अपना धर्म निभा रहे थे , चारों ओर से तीर भाले तलवार चलाये जा रहे थे , या तो ढेर होगा अर्जुन , या कृष्ण प्रतिज्ञा टूटेगी , भीष्म प्रतिज्ञा सुन , कैसे गुडाकेष को निद्रा आएगी , पर वो तो सोता था गहरी निद्रा में , भरोसा था अटल कि है वह हरी की क्षत्र छाया में , चारों ओर हा - हा कार मच गया था , मानवता से मनुष्य का विश्वास उठ गया था , पाला पोसा , जिन हाथों से खिलाया था , मार दुँगा उसे ऐसा संकल्प कैसे उठाया था , बहुत रोष में पितामह आ गये थे , तीर पर तीर मारकर व्यग्र किये और हुए जा रहे थे , नेत्र कृष्ण के लाल हो गए थे , देख भक्त पर विपति कृष्ण बेहाल हो गए थे , ...
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