Posts

तितली

Image
            तितली बैठ कर अक्स पर अपने तितली , आईने की तितली से कहने लगी , छोड़ कर ये ख्वाब की दुनिया , आ तुझे मैं हकीकत में गले लगा लूँ ...

अब जाग

Image
    अब जाग   देह है जो 'दे' सबको, न कर मोह उसका, छोड़ना है एक दिन जिसको, झंझट हैं सब तर्क, उलझाने की विधियाँ हैं, ये कहा उसने, ये किया उसने, ये चालाकी, ये छल -कपट, बीत गये कहते -कहते जनम अनंत, अब जाग और मिलादे खुद को हरी की इच्छा में, नाम का ले आसरा, जो है  भवसागर का एकमात्र सहारा।। रिद्धिमा 9-11-22 

अनभिज्ञ

Image
अनभिज्ञ सच्चिदानंद के अर्थ से कोसों दूर, जब मेरा मन स्वयं के अर्थ को खोजने निकलता है, तो कभी प्रसन्नता में अपनी उपलब्धियों को, और कभी दुःख में अपने संघर्षों को याद करने लगता है, और कौन है जो देखता है सब - बस उससे अनभिज्ञ बना रहता है।   रिद्धिमा सर्राफ 13/09/22

Grace 2

Image
  Grace 2 वृक्ष ने आश्चर्य से देखा , जब परम चक्र के बाहर निकल , किसी ने शांत होना सीख लिया , कर्तव्य में रत , उद्यम में तत्पर , रंगीन ऊन से बने जीवन में , रंग हैं सब - यह जान कर , हाथ फैलाकर सबका स्वागत किया , मन के शांत होते ही , बीच भँवर में नाव की , उथल - पुथल भी रुक गई , ताने - बाने से बनी जिंदगी , अरण्य में सूर्य की ऊष्मा के सामान और खिल गई।  रिद्धिमा    The tree looked in amazement, When the ultimate chakra comes out, Somebody learned to calm down engaged in duty, ready for enterprise, In a life made of colored wool, Colors are all - knowing this, Welcomed everyone with outstretched hands, As soon as the mind is calm, Boat in the middle of the whirlpool, The turmoil also stopped, Warped life, Like the sun's heat in a deep forest, it blossomed more. Riddhima    

मेरा देश विश्वविजयी कैसे बन सकता है ?

Image
 .. मेरा देश विश्वविजयी कैसे बन सकता है ?  स्वीकार है मुझे जेल में रहना, स्वीकार है मुझे फांसी पर लटकना, स्वीकार है सब कुछ स्वराज के लिए जो है मेरा सपना, स्वीकार है सब कुछ अब नये स्वतंत्र भारत को है देखना, आज़ाद हिन्द फौज की गाथाएँ, जो शौर्य को जगाती हैं, पिता जी ये कथाएं हमें क्यों नहीं पढाई जाती हैं ?  पिता जी कुछ मौन थे, देश के इतिहास में ये कुर्बानी की कहानीयाँ  बच्चों तक क्यों नहीं है, सोच ही रहे थे, कि नन्ही लक्ष्मी ने फिर पूछा, पिता जी देश आज़ाद हो गया, तो क्या अब हम मनमानी के लिए  स्वतंत्र हैं ? पिता ने कहा-  स्वछंद और स्वतंत्र में अंतर होता है, महिमा और मर्यादा न हो भंग, ये भी ध्यान रखना होता है, लक्ष्मी ने फिर कहा- ये महिमा और मर्यादा क्या होती है? पिता ने उत्तर दिया- योग, संस्कृति और विज्ञान से, देश की महिमा उजागर होती है, चोरी, भ्रष्टाचारी , संविधान के  खण्डन से, देश की मर्यादा उल्लंघित होती है, तभी एक बात और दिमाग में आई, और लक्ष्मी कुछ उत्साहित होकर बोली, मेरा देश विश्वविजयी कैसे बन सकता है ? अब इस प्रश्न का उत्तर,  हम सब पर आता है, कह...
Image
  .. Sigmund Freud’s Journey from ‘Libido’ Theory to the ‘Unconscious’ Theory in Art https://www.ijariit.com/manuscripts/v7i4/V7I4-1451.pdf link -   Author Ridhi Sarraf Riddhima   International renowned artist and awarded with fellowship by culture ministry of India From time to time all art and aesthetics reflect the current intellectual trends of their time. Sigmund Freud of Austria, a revolutionary, the great physician of the human mind, the founder of psychoanalysis, was not only a neurologist, psychiatrist, but also a philosopher, writer, poet. In short, he did not leave any subject untouched. Sigmund Freud discussed psychoanalysis as a way to deal with psychopaths and as an intellectual discipline.   A kind of upheaval or revolution of ideas was by Sigmund Freud a medical man who founded the science of psychoanalysis. Psychoanalysis initially emerged as a technique to treat mental illness, which was related to mental diseases. Then Freud tried...

माटी का बैभव

Image
 ..       माटी का वैभव   प्रबल है नियति का खेल , अगोचर कर्म की धारा , रहना है सचेत , और गुदड़ी के लाल को भी है जानना , कहते हैं सूर्य रेखा से होते हैं सम्पन्न , पर पुत्र उन्हीं का रहा आजन्म खिन्न , बहुत दूर लगती है प्रसन्नता , नहीं भाती कभी कभी तो भव्यता , जैसे थी उर्मिला के लिए अयोध्या , ऐसे नहीं भाती पिया बिना बिछौने की कोमलता , अर्थ कीर्ति का लोभ है भैरव , लेकिन फिर भी सब है माटी का वैभव।  आभार  रिद्धिमा  १८-०७-२०२१