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मुमकिन है

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                                                                 मुमकिन है कि लफ़्ज - लफ़्ज आइना बन जाए , नज़र हो तेरी और अश्क़ गज़ल की पलकों पर सज जाए , और मुमकिन है यह भी तसव्वुर से मोहब्बत हो इतनी , कि अक्स-अक्स रह जाए और मजमून ही खो जाए .. 

सीमाओं के पार Transcend Boundaries

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 Transcend Boundaries An artist by nature, an out-of-this-world person,   Even in that thing beyond borders, Something excites these things beyond the horizon, Know which is the field of ignorance that binds the artist, By filling the paintbrush, the color engraves these pictures,   Some figures that do not belong to this place, Ahh! You can call it a lie too,   because you don't even know it, Hey even the artist doesn't know In this world of dreams, The artist takes you on a tour of a new world, Yes, he is an artist who can paint feelings, from senses to knowledge, And makes life fragrant with knowledge... सीमाओं के पार स्वभाव से ही एक कलाकार इस दुनिया से बाहर का व्यक्ति,   उसमें भी सीमाओं के पार की बातें,  कुछ उत्साहित करती हैं ये क्षितिज से पार की बातें, जाने कौन सा वह अज्ञान क्षेत्र है जो कलाकार को बांधता है,  तूलिका में भरकर रंग इन चित्रों को उकेरता है,  कुछ आकृतियाँ जो इस जहाँ की है ही नहीं,  आह ! कह ...

तितली

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            तितली बैठ कर अक्स पर अपने तितली , आईने की तितली से कहने लगी , छोड़ कर ये ख्वाब की दुनिया , आ तुझे मैं हकीकत में गले लगा लूँ ...

अब जाग

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    अब जाग   देह है जो 'दे' सबको, न कर मोह उसका, छोड़ना है एक दिन जिसको, झंझट हैं सब तर्क, उलझाने की विधियाँ हैं, ये कहा उसने, ये किया उसने, ये चालाकी, ये छल -कपट, बीत गये कहते -कहते जनम अनंत, अब जाग और मिलादे खुद को हरी की इच्छा में, नाम का ले आसरा, जो है  भवसागर का एकमात्र सहारा।। रिद्धिमा 9-11-22 

अनभिज्ञ

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अनभिज्ञ सच्चिदानंद के अर्थ से कोसों दूर, जब मेरा मन स्वयं के अर्थ को खोजने निकलता है, तो कभी प्रसन्नता में अपनी उपलब्धियों को, और कभी दुःख में अपने संघर्षों को याद करने लगता है, और कौन है जो देखता है सब - बस उससे अनभिज्ञ बना रहता है।   रिद्धिमा सर्राफ 13/09/22

Grace 2

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  Grace 2 वृक्ष ने आश्चर्य से देखा , जब परम चक्र के बाहर निकल , किसी ने शांत होना सीख लिया , कर्तव्य में रत , उद्यम में तत्पर , रंगीन ऊन से बने जीवन में , रंग हैं सब - यह जान कर , हाथ फैलाकर सबका स्वागत किया , मन के शांत होते ही , बीच भँवर में नाव की , उथल - पुथल भी रुक गई , ताने - बाने से बनी जिंदगी , अरण्य में सूर्य की ऊष्मा के सामान और खिल गई।  रिद्धिमा    The tree looked in amazement, When the ultimate chakra comes out, Somebody learned to calm down engaged in duty, ready for enterprise, In a life made of colored wool, Colors are all - knowing this, Welcomed everyone with outstretched hands, As soon as the mind is calm, Boat in the middle of the whirlpool, The turmoil also stopped, Warped life, Like the sun's heat in a deep forest, it blossomed more. Riddhima    

मेरा देश विश्वविजयी कैसे बन सकता है ?

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 .. मेरा देश विश्वविजयी कैसे बन सकता है ?  स्वीकार है मुझे जेल में रहना, स्वीकार है मुझे फांसी पर लटकना, स्वीकार है सब कुछ स्वराज के लिए जो है मेरा सपना, स्वीकार है सब कुछ अब नये स्वतंत्र भारत को है देखना, आज़ाद हिन्द फौज की गाथाएँ, जो शौर्य को जगाती हैं, पिता जी ये कथाएं हमें क्यों नहीं पढाई जाती हैं ?  पिता जी कुछ मौन थे, देश के इतिहास में ये कुर्बानी की कहानीयाँ  बच्चों तक क्यों नहीं है, सोच ही रहे थे, कि नन्ही लक्ष्मी ने फिर पूछा, पिता जी देश आज़ाद हो गया, तो क्या अब हम मनमानी के लिए  स्वतंत्र हैं ? पिता ने कहा-  स्वछंद और स्वतंत्र में अंतर होता है, महिमा और मर्यादा न हो भंग, ये भी ध्यान रखना होता है, लक्ष्मी ने फिर कहा- ये महिमा और मर्यादा क्या होती है? पिता ने उत्तर दिया- योग, संस्कृति और विज्ञान से, देश की महिमा उजागर होती है, चोरी, भ्रष्टाचारी , संविधान के  खण्डन से, देश की मर्यादा उल्लंघित होती है, तभी एक बात और दिमाग में आई, और लक्ष्मी कुछ उत्साहित होकर बोली, मेरा देश विश्वविजयी कैसे बन सकता है ? अब इस प्रश्न का उत्तर,  हम सब पर आता है, कह...