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जाने दीजिये न पापा

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                                                                 .. *"जाने दीजिये न पापा "* ... रेलगाड़ी की कहानी बड़ी रोमांचक थी , घूमने की इच्छा और भी प्रबल हो गई थी , एक गाडी है - जहाँ पंद्रह मिनट में दस साल बीत जाते हैं , लगभग डेड दो घंटे में सभी वापस आ जाते हैं , बस कुछ देर की ही तो बात है , आप आराम कीजिये , मैं जाकर जल्द वापस आ जाऊँगी।। पूछा पिता ने - वहाँ जाकर मुझे भूल तो न जाओगी ? नहीं पापा - आपके जैसा कोई नहीं , और फिर मैं तो आपकी लाड़ली हूँ न ? आपको कैसे भूल जाऊँगी। पिता कुछ मुस्कराये , बोले , फिर किसी दिन चली जाना। मैं थोड़ा रूठ गई - आप रोज ऐसे ही कहते हैं , दो तीन घंटे में क्या बदल जायेगा , "जाने दीजिये न पापा " कितने किस्से सुने हैं - वहाँ हजारों लोग - आपके अपने होते हैं , आप उनसे और वो आपसे प्यार करते हैं , मुझे देखना है वो सपनों का शहर , जो सपना जैसा नहीं लगता , वो रेल...

Grace 6

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                                                       ..                                                   Grace - 6                                                           Grace  अरण्य से गुजरते मन्त्रहीन विचारों के जाल से दूर दूर दूर तक फैली पूरी तरह से अनछुई सी एक पेड़ की शाखाएँ देख मैं धीरे से बैठ गई  अचानक एक पत्ती की खुशबू  मेरे विचारशून्य मन को बिना कुरेदे आनंद का आभास देने लगी तरंगें जैसे झूला झुला रही थी वो जंगल की नीरवता और गहन हो गई ध्यान देने पर भी वहाँ बस वह खुशबू  ही रह गई रिद्धिमा 16 - 06 - 2021

किरदार

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                                                         ..                                                      किरदार धर्म युद्ध में अधर्म के साथ खड़े होकर , अपना धर्म निभा रहे थे , चारों ओर से तीर भाले तलवार चलाये जा रहे थे , या तो ढेर होगा अर्जुन , या कृष्ण प्रतिज्ञा टूटेगी ,  भीष्म प्रतिज्ञा सुन , कैसे गुडाकेष को निद्रा आएगी , पर वो तो सोता था गहरी निद्रा में , भरोसा था अटल कि है वह हरी की क्षत्र छाया में , चारों ओर हा - हा कार मच गया था , मानवता से मनुष्य का विश्वास उठ गया था , पाला पोसा , जिन हाथों से खिलाया था , मार दुँगा उसे ऐसा संकल्प कैसे उठाया था , बहुत रोष में पितामह आ गये थे , तीर पर तीर मारकर व्यग्र किये और हुए जा रहे थे , नेत्र कृष्ण के लाल हो गए थे , देख भक्त पर विपति कृष्ण बेहाल हो गए थे , ...

सत्य शिव और सुन्दर ..🙏🌺🙏

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.. सत्य शिव और सुन्दर  🙏🌺🙏   सूर्य कहाँ कभी उदय होता है , और कहाँ कभी अस्त होता है।   पर दिखता भी है यही , और कहा भी जाता है यही। तम भी ऐसे ही कर देता है दिशाहीन , डर के भूतों का शोर कर जाता है ग़मगीन।   निशा जब हो जाती है किरण विहीन , और मन हो जाता है मन्त्र हीन , रुको , ठहरो उसी क्षण , जैसे ठहरा था अर्जुन। स्वाति की बूँद है यह क्षण , उभरेंगे मोती बनकर सभी सुजन। जानो जीवन का मर्म , जैसे नचिकेता ने जाना था। एकतत्व है परा - अपरा , जैसे कपिल देव ने पहचाना था।   न घबराओ उसको याद करो , जानो और विश्वास करो। गूढ़ रहस्य है ऋचाओं में अभी , उद्घटित करो , उपचार करो। परोपकार और करुणा प्रधान , सत्य शिव और सुन्दर की स्थापना करो। धन्यवाद रिद्धिमा २०-०४ - २१ please also visit - Artisttech

बाबा साहब भीमराव रामजी अंबेडकर

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                                                       .. "नीले आसमान के नीचे हम सब बराबर हैं " बाबा साहब भीमराव रामजी अंबेडकर  भारत के तीन प्रमुख प्रतिनिधियों में जिनका नाम आता है , शिक्षा ही समाज को बदल सकती , जिनका जीवन यह बतलाता है।   अस्पृश्यता के मैल को धोकर , जो दलितों का मसीहा कहलाता है, संविधान की पुस्तक लेकर जो भारत के कण - कण में बस जाता है।   माँ -भीमा और पिता -राम जी के नाम को जो उज्जवल कर जाता है , कृष्ण केशव - गुरु के कारण जो सकपाल से अंबेडकर कहलाता है।   समाजसेवी दादा केलुस्कर ने जिनको गायकवाड़ के सहयोग से लंडन में पढ़वाया था , नौ भाषाओँ के साथ बत्तीस डिग्री   वाला प्रथम दलित भारतीय कहलाया था। साहू के सहयोग से मूकनायक साप्ताहिक निकलवाया था , बहिस्कृत हितकारिणी सभा के द्वारा " कलंक है अस्पृश्यता" यह विश्वास दिलाया था।   वटिंग फॉर अ वीज़ा और हू वर द सुद्राज को लिखकर कुछ समाज को समझाया था...

आत्मदीप

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 .. आत्मदीप महाप्राण है , महाभाग्य है , महाकाव्य है , महाद्वंद भी , महाप्रयाण की महायात्रा है , महाभारत है नित्य ही , रंग छंद है , पंक्ति बद्ध है , तान है इसमें संगीत की , महाकटार है , तीव्र धार है , लड़ना है और मिट जाना भी , स्वसुधार है , स्वउद्धार है , खोज है यह सत्य की , रंग मंच है , दृष्टि भंग है , आर्त नाद है , स्वप्न मात्र ही , दृश्य कला है , मंगल विधा है , लक्ष्य कला है और कर्म कला ही , ज्ञान स्वयं का , तम अहम् का, ज्योत मरम का , अंधकार अब और नहीं , भारत रत्न है, सेवा स्वप्न है , क्रिया धर्म है , उपकार नहीं , दीवानापन है , नभ भी कम है , आत्मदीप है , अतृप्त नहीं।   रिद्धिमा    24 - 12 - 2021          Please visit -                            Meditation 1

साथ तुम्हारा

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 .. साथ तुम्हारा   जान कर तुमको , न तुमको भूल पाएंगे , कैसे कह दिया तुमने हम किसी और के हो जायेंगे , तुमसे मोहब्बत है , कि नहीं है , ये तो नहीं पता , पर ये मोहब्बत किसी और से भी न कर पाएंगे , माना लब पर जिक्र होता है तुम्हारा कभी - कभी , पर जेहन ने तो तुम्हें भुलाया ही नहीं कभी , आते हो तुम धड़कन में साँसों की महक में , माना होता है मुश्किल से  नज़ारा दीदार में , तुम तुम्हारा प्यार सब याद है मुझे , अब कोई गिला कोई शिकायत नहीं मुझे , साथ तुम हो , हो आसपास , बस अहसास काफी है , बात तो तब हो , जब यह अहसास ही काफी है।   रिद्धिमा  20 - 01 - 2021